मंगलवार, 24 नवंबर 2015

शिक्षा व्यवस्था

 आज की शिक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि यहाँ बच्चों के दिमाग में केवल जानकारी (इन्फॉर्मेशन) ठूँसी जाती है — वह भी केवल अच्छे नम्बर लाने के उद्देश्य से। इस प्रक्रिया में बच्चों की मौलिक सोच, कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता कुचली जाती है।

परीक्षा की तैयारी एक रटंत प्रक्रिया बन चुकी है, जहाँ सवाल वही होते हैं और जवाब भी वही। ऐसे में सवालों से जूझने का जज्बा, नए रास्ते खोजने की प्रवृत्ति, और कुछ अलग सोचने की आदत धीरे-धीरे मरती जाती है।

शिक्षा का उद्देश्य केवल तथ्य याद कराना नहीं, बल्कि सोचने, समझने और कुछ नया रचने की प्रेरणा देना होना चाहिए। वरना हम ऐसे बच्चों को तैयार करेंगे जो रोबोट की तरह तो चलेंगे, लेकिन सपने देखने और उन्हें गढ़ने की ताकत नहीं रखेंगे।
वैभव बेख़बर